एकनाथ शिंदे की तारीफ करते हुए ठाणे में उनके पड़ोसी रहे एक शख्स ने बताया कि यह बात बॉम्बे दंगा 1989 का है। जब महिला और बच्चे की जान बचाने के लिए शिंदे ने खुद रिक्शा चलाकर उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।
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